मेरी बेबसी का बयान है
बस चल रहा न इस घडी
रस हसरत का निचोड़ दू
कस बाहों में आ तोड़ दू
चाहू क्या जानू न
छीन लू.... छोड़ दू!!
इस लम्हे क्या कर जाऊ
इस लम्हे क्या कर दू मै
जो मुझे चैन मिले आराम मिले
और हो और हो साँस का शोर हो
आंच की ओर बढे
और हो और हो साँस का शोर हो
ताप भी और चढे
और हो और हो और मिले
हम और भी जल जायें
तुझे पहली बार मै मिलता हु हर दफा
मेरी बेबसी का बयान है
तुझे छीन लू या छोड़ दू
तुझे मांग लू या मोड़ दू
इस लम्हे क्या कर जाऊ
मै हसरत में उलझी डोर हुआ
सुलझा दे
मै दस्तक हु तू बंद किवाड़ो सा
खुलजा रे
ओ बेबसी मन में बसी
आ जाते जाते जी ले सपना...
रुके से न रुके
ये न थके
आंधी सी जो चले
इन सांसो की
पता भी न चले
कहाँ पे क्या जले
है डर से तन मन की
सहरान से हसरत की
सुरगन से भड़के आग
शोला शोला जाके बुझे
धुआं धुआं लगे मुझे
मेरी बेबसी का बयान है...
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